20+ Best Poultry Farming for Beginners guide in India

Poultry Farming एक विशिष्ट कार्य है तथा इसके लिए वैज्ञानिक जानकारी जरूरी है। इसके चलाने व मुख्य कार्यों के लिए काफी पूजी की जरूरत तो है ही, साथ ही निरंतर सतर्कता की भी जरूरत होती है क्योंकि हम जीवित पक्षियों को पाल रहे होते हैं। इसमें पूरे सपताह छुट्टी के बगैर लगातार काम करना होता है। इसलिए जरूरी है कि यह काम शुरू करने से पहले इस पर गंभीरता से विचार किया जाए ।

Best Poultry Farming for Beginners guide in India - मुर्गी फार्म,
Poultry Farming

कुछ लोग Poultry Farming को एक साइड बिजनेस या लघु व्यवसाय के रूप में शुरू करते हैं। और कालांतर में इस योजना में अधिक पूजी लगाकर इसे पूर्ण व्यावसायिक रूप में चलाते हैं। कुक्कुट पालन को छोटे स्तर पर आरम्भ करना तथा अनुभव लेकर धीरे-धीरे इसका विकास करना अधिक बुद्धिमता का काम है। एक सफल मुर्गीपालक के लिए इस काम का वैज्ञानिक ज्ञान व व्यवहारिक अनुभव होना जरूरी है। रख-रखाव या मैनेजमेंट इसके सफल होने में मुख्य भूमिका निभाता है। अत: रख-रखाव संबंधी ज्ञान का होना बहुत ही आवश्यक है।

Poultry Farming for Beginners guide:-

 कुक्कुट फार्म Poultry Farming शुरू करने के लिए सबसे पहली चीज जो देखनी होती है वह भूमि एवं जगर का चुनाव। इसके लिए निम्नलिखित मुद्दों को ध्यान में रखें :-

1. स्थान का चुनाव :- स्थान का चुनाव करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यह नीचली या पानी रूकने वाली जगह पर न हो, क्योंकि इस तरह के स्थान पर नमो को रोका नहीं जा सकता। इसलिए भूमि हमेशा ऐसी हो जहाँ पर बाढ़ का प्रकोप या पानी का रूकाव न होता हो तथा भूमि का स्तर ऊंचा हो, जिससे नालियों के द्वारा पानी की निकासी का अच्छा प्रबंध हो सके।

2.सड़क से दूरी:- Poultry Farming (मुर्गी फार्म) में अंडों ब्रायलर, मुर्गी दाना आदि का आना जाना (आवागमन) पूरे वर्ष चलता रहता है। इसलिए मुर्गी फार्म का मुख्य सड़क से या पथ से जो यातायात के लिए पूरे साल खुली रहती हो. जुड़ा होना जरूरी है। ताकि कुक्कुट उत्पादन जैसे अंड ब्रायलर व मुर्गा दाना आदि का लाना ले जाना बर्ष भर आसानी से होता रहे। इसलिए हर मौसम में खुले रहने वाले अच्छे रास्तों का होना जरूरी है।

3.बाजार सुलभता:- Poultry Farming (मुर्गी फार्म) से बाजार या विक्रय केन्द्र को दूरी जितनी अधिाक होगी अंडो, ब्रायलरों तथा कुक्कुट आहार पर आन वाला ट्रान्सपोर्ट का खर्च उतना ही अधिक होगा। इसलिए मुर्गी फार्म का शह अथवा कस्बे के जितने नजदीक संभव हो, लगाना चाहिए। साथ ही मुगा फार्म खोलने के लिए भूमि की कीमत की भी ध्यान में रखना जरूरी है। क्योंकि आज कल शहर या कस्बा के निकट भूमि प्रायः बहुत महंगी होती है।

4.पानी :- मुर्गी पालन (Poultry Farming) के लिए अच्छे व पर्याप्त मात्रा में पानी की निरंतर जरूरत होती है। मुर्गिया पानी काफी पीती है। प्रतिदिन एक हजार मुर्गियां को औसतन 300 से 400 लीटर तक पानी की जरूरत होती है। भूमि का चयन करने से पहले मुर्गीपालक को पनी की गुण्वत्ता तथा सुलभता का ध्यान रखना चाहिए। पानी की कमी दूर करने के लिए हैंड पम्प या बिजली/डीजल चालित कुएँ (ट्यूबवैल) लगाने संबधी प्रश्न को भी भूमि का चुनाव करते समय ध्यान में रखना चाहिए। यदि आप अधिाक वैज्ञानिक तरीका अपनाना चाहते हैं तो किसी प्रयोगशाला में पानी की जाँच भी करा सकते है।

5.बिजली की प्रबंध :- बिजली अथवा विद्युत शक्ति का होना ब्रायलर तथा लेयर फार्म के लिए आवश्यक है।

6.दूसरे फार्मों से दूरी :- कुक्कुट पालन में जहाँ तक हो भूमि ऐसी जगह लेनी चाहिए जो दूसरे मुर्गी फार्मों से दूरी पर हो ताकि रोगों की संक्रामकता से बचा जा सके तथा दूसरे फार्मों का पानी ड्रेनेज फार्म पर न आने पाए। 

मुर्गी फार्म (Poultry Farming) में मकान बनाने के लिए नियम :-


पोल्ट्री फार्म Poultry Farming में मुर्गियों की सुरक्षा, आराम तथा सुचारू रूप से अंडों के उत्पादन के लिए अच्छे मकान की जरूरत होती है। शैड बनाने में फार्म पर सबसे ज्यादा खर्च आता है। मकान या पोल्ट्री हाऊस कम खर्च में व अच्छी प्रकार बनाने चाहिए। मकान बनाने में सामग्री का उतना महत्त्व नहीं जितना मकान की परिधि, हवादार क्रास भंटिलेखन वाला होना तथा मकान का दैनिक कार्यों की सहुलियतों में सहायक होना जरूरी है।

पोल्ट्री हाऊस या मकान की आवश्यक बातें :-

1. दिशा – Poultry Farming में मुर्गियों की शैड या मकान पूर्व/पश्चिम दिशा की ओर आमुख होना चाहिए ताकि गर्मी में लू तथा बरसात में बारिश की बौछारों से बचा जा सके।

2.चौड़ाई – Poultry Farming में मुर्गियों की शैड की चौड़ाई 30 फीट (9 मीटर) के लगभग होना चाहिए जिससे वह हवादार हो व निर्माण प्रक्रिया में कम खर्चोका हो। 40 फीट (12 मीटर) चौड़ाई वाले शैड को हवादार बनाने में मुश्किल होती है तथा 20 फीट (6 मीटर) की चौड़ाई वाले अधिक खर्चीले होते हैं।

3.लम्बाई – लम्बाई आवश्यकतानुसार हो सकती है। साधारण रूप से 100 से 120 फीट (30.5-36.5 मीटर) लम्बाई सही मानी जाती है। ब्रायलर फार्म में एक वर्ग फीट फ्लोर स्पेस प्रति चूजे के हिसब से जग दी जाती है तथा लेयर के लिए लगभग 2-2.5 वर्ग फीट (1860-2325 वर्ग से मी.) प्रति बड़ी मुर्गी के हिसाब से जगह की जरूरत होती है। अत: 30 फीट X 100 फीट ( 9 X 30 मीटर) (कुल 3000 वर्ग फीट) (279 वर्ग मीटर) के घर कभर्ड एरिया में आप 3000 ब्रायलर या 1200-1500 लेयर रख सकते हैं।

4.फर्श – फर्श पक्का कंकरीट का बना होना चाहिए ताकि जमीन का सीलन, जल व चूहों से बचाव हो सके। यह जमीन के तल से लगभग 10 इंच (25.40) से.मी.) ऊँची होना चाहिए।

5.दिवारें – Poultry Farming में डीप लिटर सिस्टम या लकड़ी के बुरादे वाले बिछावन युक्त शैड में साइड की दीवारें 2-2.5 फीट (60 से.मी. 76 से.मी. ) होनी चाहिए पर पिजरे वाले शैड में साइड की दीवारों को जरूरत नहीं होती। केवल जाली ही लगाई जाती है।

6. वायर नेटिंग या जाली – अच्छी हवादारी के लिए 4.5 फीट की जाली साइड दीवारों के ऊपर फिक्स होनी चाहिए यानी 1.35 मीटर। जाली मजबूत होनी चाहिए। जंग लगने वाली नहीं होनी चाहिए।

7.छत – Poultry Farming में पोल्ट्री शैड में छत पर खर्च सबसे अधिाक बैठता है। छत कई प्रकार की हो सकती है। यह एस्बेस्टस की या हल्की छत हो सकती है. यह फुस से भी बनाई जा सकता है। फुस छप्पर की छत सस्ती होती है। 

8.ओवर हैंग (छज्जा) – Poultry Farming में हर प्रकार के शैड या मकान में चाहे यह सिंगल हो या दो मंजिला बरसात की बौछारों में बचाव के लिए दोनों ओर ओवर हैंग (छज्जा) होना जरूरी है। छज्जा 1.5 फोट ( 1.O6 मीटर) बाहर की ओर होना चाहिए, यह बारिश से बचाव के लिए बहुत जरूरी है।

9.पार्टीशन – अच्छे रख-रखाव के लिए यह सुझाव दिया जाता है कि शैड में पार्टीशन या विभाग बनाने चाहिए। मुर्गियों को बड़े समूहों में रखने के बजाय पैनों में छोटे-छोटे गुपों में रखना हमेशा अच्छा होता है। इससे रख-रखाव ज्यादा अच्छा होता है और अलग अलग जगह से खरीदे गये चूजों तथा अलग अलग उम वाली मुर्गियों का एक ही स्थान पर, एक हो शेड में रखा जा सकता है। 

░Y░o░u░ ░M░a░y░ ░a░l░s░o░ ░L░i░k░e░

लाभदायक सूअर पालन के लिये मुख्य बातें |

गर्भवती गाय भैंस की देखभाल कैसे करें |

पशुपालन – पूछे जाने वाले प्रश्न एवं समाधान |

मुर्गी फार्म (Poultry Farming) में पानी की व्यवस्था:-

चूजों को केवल वही पानी पिलायें जो आप स्वयं पी सकते हों।

1.पानी का तापमान ठण्ड के मौसम में कमरे के तापमान से कम न हो जबकि गर्मी में जितना ठण्डा हो उतना बेहतर है।22°C से अधिक तापमान का पानी उचित नहीं।

2.पानी सदैव उपलब्ध हो और बर्तन की ऊँचाई चूजों की पीठ से न ऊँची हो न नीची। उँचाई को सदैव ठीक करते रहें ।

3.आम भाषा में पानी खारा या नमकीन न हो। न ही पानी गन्दा, मटमैला हो, न ही उसमें कोई जीवाणु व किटाणु हो।

4.आवश्यकतानुसार पानी के बर्तनों की संख्या पूरी होनी चाहिये।

5.बल्कि गर्मी में संख्या बढ़ाकर दुगुनी कर दें। छोटे बच्चों में शुरू के 4-5 दिन उन्हें 3-4 फुट से अधिक पानी के लिए चलना न पड़ें।

6.पानी के बर्तनों की सफाई दिन में दो बार सुबह और शाम जूट या से मूज रगड़ कर अवश्य करें। बाद में लाल दवा (पोटाशियम) या ब्लिचिंग पाऊडर या किसी अच्छे किटाणुनाशक में खंगाल लें। अगर दो सैट हों तो एक को रोज धूप में रख दें।

7.पनी की टंकी ढकी हो और सप्ताह में एक बार अवश्य ठीक ढंग से साफ की जाये। ब्लीचिंग पाऊडर थोड़े से पानी में मिलाकर हर जगह रगड़ कर धो लें।

8.उचित होगा यदि पानी में 0.2 ग्राम से 0.5 ग्राम ब्लीचिंग पाऊडर प्रति क्यूबिक फिट (26-27 लीटर) मिलाकर पीने को दिया जाये।

Poultry Farming (मुर्गी फार्म) प्रकाश व्यवस्था:-

1.शुरू के 14-15 दिन तक प्रकाश जयादा दिया जा सकता है अर्थात प्रत्येक 100 वर्ग फुट पर 40-60 वाट का बल्ब इसके बाद इन्हें 15-25 वाट का ही बल्ब काफी है।

2.7 दिन के बाद कुल 23 घन्टे ही प्रकाश दें तो बेहतर होगा। शाम को सूरज डूबने के एक घन्टे बाद इन्हें लाइट दें।

3.पकड़ते समय यदि लाईट बुझाकर एक लाल या नीला बल्ब लगाकर पकड़ा जाये तो ब्रायलर पर कोई असर नहीं होगा।

4.एक समय में एक ही वाट के बल्ब हर होल्डर में लगायें। कहीं ज्यादा कहीं कम वाट के बल्ब लगाना हानिकारक है अधिाक वाट के बल्ब लगाने से चूजों में नोचने की समस्या आ सकती है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *