Adverb in Hindi: क्रिया विशेषण – परिभाषा, भेद, कार्य, उदाहरण

Adverb in Hindi :क्रिया विशेषण परिभाषा:-

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Adverb in Hindi: क्रिया विशेषण - परिभाषा, भेद, कार्य, उदाहरण

जिस अव्यय से क्रिया की कोई विशेषता जानी जाती है, उसे ‘क्रियाविशेषण’ कहते हैं।

यहाँ, वहाँ, धीरे, जल्दी, अभी बहुत आदि शब्द क्रिया विशेषण है। ‘राम वहाँ जा रहा है’ इस वाक्य में ‘वहाँ’ शब्द क्रियाविशेषण है, क्योंकि यह ‘जाना’ क्रिया को स्थान सम्बन्धी विशेषता बतलाता है। वह आज पढ़ने गया है’ तथा ‘उससे बाजार में अचानक भेट हो गयी इन वाक्यों में आये ‘आज’ तथा ‘अचानक’ शब्द क्रमशः क्रिया का काल तथा रीति से सम्बद्ध विशेषता बतलाते हैं। यह बहुत खाता है’ में ‘बहुत’ शब्द ‘खाना’ क्रिया को परिमाण (मात्रा) सम्बन्धी विशेषता बतलाता है।

क्रियाविशेषण के कार्य:-

क्रियाविशेषण के निम्नलिखित कार्य हैं:-

१. क्रियाविशेषण क्रिया की विशेषतः बतलाता है, जैसे वह धीरे-से बोलता है। वह जोर से हँसता है। उपर्युक्त वाक्यों में धीरे से’, ‘जोर से’ क्रियाविशेषण हैं, जो क्रमश: ‘बोजना’ तथा ‘हँसना‘ क्रियाओं की विशेषता बतलाते हैं।

२. क्रियाविशेषण क्रिया के सम्पादित होने का पुस्तकें धड़ाधड़ बिक रही हैं। ढंग बतलाता है, जैसे यहाँ ‘धड़ाधड़’ क्रियाविशेषण ‘बिकने’ क्रिया का ढंग बतलाता है।

३. क्रिया विशेषण क्रिया के होने की निश्चयता तथा अनिश्चयता का बोध कराता है; जैसे- वह अवश्य आयेगा। वह शायद खायेगा। यहाँ ‘अवश्य’ और ‘शायद’ क्रियाविशेषण ‘आना’ और ‘खाना’ क्रिया की निश्चयता और अनिश्चयता का बोध करा रहे हैं।

४. क्रियाविशेषण क्रिया के होने में निषेध और स्वीकृति का बोध कराता हैं; जैसे – मत पढ़ो। हाँ, आओ। न लिखो। ठीक कहते हो। ‘मत’ और ‘न’ क्रियाविशेषण ‘पढ़ने’ और ‘लिखने’ क्रियाओं का निषेध करते हैं। ‘हाँ’ और ‘ठीक’ क्रियाविशेषण ‘आना’ और ‘कहना’ क्रियाओं की स्वीकृति का बोध कराते हैं।

५. क्रियाविशेषण क्रिया के घटित होने की स्थिति, दिशा, विस्तार और परिमाण का बोध कराता है, जैसे – वह ऊपर सोता है। घर के भीतर बैठो। यहाँ ‘ऊपर’ और ‘भीतर’ क्रिया विशेषण ‘सोना’ और ‘बैठना’ क्रियाओं की स्थिति का बोध कराते हैं। सड़क के दाएँ चलो। जाओ, उधर ढूँढ़ो। यहाँ ‘दाएँ’ और ‘उधर’ क्रियाविशेषण ‘चलना और ‘ढूँढ़ना’ क्रियाओं की दिशाओं का बोध कराते हैं।

क्रियाविशेषण के भेद:-

क्रियाविशेषणों का वर्गीकरण तीन आधारों पर किया जाता है:-

 (क) प्रयोग

(ख) अर्थ

(ग) रूप

(क) प्रयोग:- प्रयोग के आधार पर क्रियाविशेषण के तीन भेद है:-

(1) साधारण

(2) संयोजक

(3) अनुबद्ध  

(1) साधारण क्रियाविशेषण:- उन क्रियाविशेषणों को कहते हैं जिनका प्रयोग वाक्य में स्वतंत्र रूप से होता है, जैसे- अब, जल्दी कहाँ आदि ।

(2) संयोजक क्रियाविशेषण:- उन क्रियाविशेषणों को कहते हैं, जिनका सम्बन्ध उपवाक्य से रहा करता है। ये क्रियाविशेषण सम्बन्धवाचक सर्वनामों से बनते हैं, जैसे-जब आप आयेंगे, तब मैं घर जाऊँगा; जहाँ आप जायेंगे, वहाँ मैं भी जाऊँगा। यहाँ ‘जब-तब, जहाँ, वहाँ संयोजक क्रिया विशेषण हैं।

(3) अनुबद्ध क्रियाविशेषण:- उन क्रियाविशेषणों को कहते हैं, जिनका प्रयोग किसी शब्द के साथ अवधारण के लिए होता है, जैसे तो, तक, भर, भी आदि।

(ख) अर्थ:- अर्थ के आधार पर क्रियाविशेषण के चार भेद हैं:-

(1) स्थानवाचक क्रियाविशेषण

(2) कालवाचक क्रियाविशेषण

(3) परिमाणवाचक क्रियाविशेषण

(4) रीतिवाचक क्रियाविशेषण

(1) स्थानवाचक क्रियाविशेषण:- यह दो प्रकार के हैं। स्थितिवाचक – यहाँ, वहाँ, साथ, बाहर, भीतर आदि। दिशावाचक – इधर उधर, किधर, दाहिने बायें आदि ।

(2) कालवाचक क्रियाविशेषण:- इनके तीन प्रकार हैं समयवाचक- -आज, कल, जब, पहले, तुरत, अभी आदि। अवधिवाचक आजकल, नित्य, सदा, लगातार, दिनभर आदि। पौन:पुन्य (बार-बार) वाचक -बहुधा, प्रतिदिन, कई बार, हर बार आदि ।

(3) परिमाणवाचक क्रियाविशेषण:- यह भी कई प्रकार का है अधिकताबोधक बहुत बड़ा भारी, अत्यन्त आदि । न्यूनताबोधक कुछ, लगभग, थोड़ा, प्रायः आदि। पर्याप्तिबोधक- केवल, बस, काफी, ठीक आदि। तुलनाबोधक -इतना, उतना, कम, अधिक आदि। श्रेणीबोधक -थोड़ा-थोड़ा, क्रमशः आदि।

(4) रीतिवाचक क्रियाविशेषण:- इस क्रियाविशेषण से प्रकार, निश्चय, अनिश्चय, स्वीकार, कारण, निषेध आदि अनेक अर्थ प्रकट होते हैं, जैसे-ऐसे, वैसे, अवश्य, सही, यथासम्भव, इसलिए, नहीं तो, ही, भी आदि।

(ग) रूप:- रूप के आधार पर क्रियाविशेषण के तीन प्रकार होते:-

(1) मूल

(2) यौगिक

(3) संयुक्त

(1) मूल क्रियाविशेषण:- जो क्रिया विशेषण किसी दूसरे शब्द के मेल से नहीं बनते, वे ‘मूल क्रिया विशेषण कहे जाते हैं, जैसे- अचानक, दूर, ठीक आदि ।

(2) यौगिक क्रियाविशेषण:- जो क्रियाविशेषण किसी दूसरे शब्द में प्रत्यय या शब्द जोड़ने से बनते हैं, वे ‘यौगिक क्रियाविशेषण’ कहे जाते हैं। ये क्रिया विशेषण संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण अव्यय तथा धातु में प्रत्यययोग से बनते हैं; उदाहरण मन से, देखते हुए, यहाँ तक, वहाँ पर आदि।

(3) संयुक्त क्रियाविशेषण:- ये कई प्रकार से बनते हैं, जैसे संज्ञाओं की द्विरुक्ति से:- घर-घर, घड़ी-घड़ी।

दो भिन्न संज्ञाओं के मेल से:- रात-दिन, साँझ-सबेरे ।

क्रियाविशेषणों की द्विरुक्ति से:- धीर-धीरे, जहाँ जहाँ

भिन्न क्रियाविशेषणों के मेल से:- जब-तब जहाँ-तहाँ ।

क्रियाविशेषणों के बीच ‘न’ आने से:- कभी-न-कभी, कुछ-न-कुछ

अनुकरणमूलक शब्दों की द्विरुक्ति से:- छटपट, धड़ाधड़

अव्यय के प्रयोग से:- प्रतिदिन यथाक्रम | 

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