40+ Best नामर्दी का इलाज घरेलु और आयुर्वेदिक उपाय क्या है ?

नामर्दी का इलाज घरेलु उपाय:-

प्रकृति के विरुद्ध चलने पर व्यक्ति अपने शरीर को नष्ट कर देता है। उसकी ताकत कम हो जाती है, उसकी उम्र कम होने लगती है और उसका चेहरा खराब हो जाता है। हैंड सेक्स, एनल सेक्स, एनिमल सेक्स और ओरल सेक्स को प्रकृति के खिलाफ माना जाता है। इस तरह के सेक्स से पुरुष सेक्स और वीर्य नष्ट हो जाते हैं। नामर्दी होने के कारण ये किसी भी महिला को शोभा नहीं देते। असली कारण यह है कि ऐसे व्यक्ति का वीर्य पानी जितना पतला होता है।

नामर्दी का इलाज  घरेलु और आयुर्वेदिक उपाय क्या है ?
स्तंभन दोष के लिए सबसे अच्छा आयुर्वेदिक दवा,
नामर्दी की आयुर्वेदिक दवा

वीर्य को गाढ़ा करने और पुरुषत्व को बनाए रखने के लिए, दागी भावनाओं और गंदे-सेक्सिस्ट विचारों से ध्यान हटाना आवश्यक है। इनके अलावा, यहां कुछ अमूल्य सुझाव दिए गए हैं जो एक आदमी को अपनी मर्दानगी वापस पाने में मदद कर सकते हैं।

 नपुंसकता होने का कारण –

बहुत अधिक मैथुन करने, असमय मैथुन करने, खट्टे, कड़वे, रूखे, कसैले, खारी एवं चटपटे पदार्थ खाने, चिंता और तनाव रखने तथा अप्राकृतिक साधनों से वीर्य त्यागने पर ही व्यक्ति नपुंसकता का शिकार होता है।

नामर्दी का इलाज करने तथा स्तंभन शक्ति बढ़ाने के लिए निम्नलिखित योगों का उपयोग करना चाहिए:-

→ सम्भोग के बाद थोड़ा-सा गुड़ खाने से कभी कमजोरी नहीं आती।

→ एक बताशे में बड़ का दूध भरकर रोज खाने से वीर्य पुष्ट होता है।

प्याज के रस में, शहद मिलाकर चाटने से निश्चय ही बल-बीर्य बढ़ता है।

दस-दस ग्राम शहद और मुलहठी को पांच ग्राम धी के साथ खाने तथा ऊपर से दूध पीने से मैथुन शक्ति बहुत बढ़ जाती है। यह परीक्षित रामबाण दवा है।

असगंध और विधारा का समभाग कूट-पीसकर छान लें। रोज एक तोला चूर्ण गाय के गरम दूध के साथ लेने से बूढ़ा व्यक्ति भी युवाओं से आगे निकल जाता है।

एक कच्चे अंडे में पच्चीस ग्राम शुद्ध शहद मिलाकर सर्दियों में सुबह के वक्त सेवन करें। इसके बाद गरम दूध पी लें। यह मर्दाना ताकत की बेहतरीन खुराक है। इसका सेवन कम से कम एक महीना तक करें खटाई एवं चावल का परहेज रखें।

एक किलो गाजर को कद्दूकस में घिसकर चार किलो दूध में पकाएं। जब दूध सूख जाए, तो उसमें एक पाव देशी घी और दस अंडे डालकर भूनें साठ ग्राम इस योग को प्रतिदिन दूध के साथ लेने से मर्दाना ताकत कई गुना बढ़ जाती है।

त्रिफले का चूर्ण, शहद, घी और कांतिसार इन सबको बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें। रात को सोने से पहले इसका सेवन करने से पुरुष की स्तंभन शक्ति में अपार वृद्धि होती है।

विदारीकंद और गोखरू चूर्ण के समभाग में मिश्री मिलाकर रख लें। रोज दूध या पानी के साथ एक तोला चूर्ण लेने से वीर्य शुद्ध और गाढ़ा होता है।

सम्भोग के उपरांत जरा सी सोठ डालकर औटाया हुआ दूध पीने से खोई शक्ति लौट आती है।

प्रातःकाल छोटी पिप्पली दूध और शहद के साथ लेने पर शरीर की पौष्टिकता बढ़ती है। छोटी पिप्पली को पीसकर शीशी में रख लेना चाहिए और एक चम्मच चूर्ण एक बार में लेना चाहिए।

देशी घी में सिंघाड़े के आटे का हलवा बनाएं। साठ ग्राम हलवे में दस ग्राम शुद्ध शहद मिलाकर रोजाना एक महीने तक खाएं। यह मर्दाना ताकत की एक रामबाण औषधि है।

असगंध के चूर्ण में घी, शहद और मिश्री मिलाकर सुबह चार तोले रोज एक मास तक सेवन करने से बूढ़ा भी जवान हो जाता है। यह एक परीक्षित नुस्खा है।

जो व्यक्ति देशी घी में भुनी हुई मछलियां खाता है, वह स्त्री प्रसंग में कभी पीछे नहीं हो पाता।

आधा सेर दूध में एक तोला सतावर पीसकर डाल दें। जब पकाने से दूध डेढ़ पाय रह जाए, तो उसमें मिश्री मिला दें। इस दूध को पीने से कामेच्छा बढ़ती है और लिंग ढीला नहीं पड़ता। यह दूध कम-से-कम चालीस दिन पिएं और स्त्री से दूर रहें।

बिदारीकंद के चूर्ण को घी, दूध और गूलर के रस के साथ पीने से बूढ़ा भी जवान हो जाता है। बिदारीकंद को कूट-पीसकर छान लें। उसमें से दो तोले चूर्ण को गूलर के स्वरस में मिलाकर चाट लें और ऊपर से दूध पिएं। दूध में घी डाल सकते हैं। यह एक अद्भुत नुस्खा है।

नामर्दी का इलाज में चार से छः ग्राम सूखी गिलोय घी के साथ सेवन करने से बल बढ़ता है, नपुंसकता दूर होती है तथा स्वप्नदोष आदि से मुक्ति मिलती है। सूखी गिलोय के स्थान पर प्रत्येक खुराक में दो ग्राम गिलोय का सत शुद्ध देशी घी के साथ लिया जा सकता है। यदि हरी गिलोय उपलब्ध हो तो उसकी मात्रा दस से पच्चीस ग्राम तक लें।

40 लाल प्याज (छोटी) को साफ करके कांटे से गोद लें और शहद में डुबोकर चालीस दिन के लिए रख दें। तत्पश्चात् एक प्याज रोज चालीस दिन तक खाएं। आपका चेहरा लाल सुर्ख हो जाएगा और मर्दाना ताकत सौ गुना बढ़ जाएगी।

गोखरू, तालमखाना, सतावर, कौंच के बीजों की गिरी, बड़ी खिरैटी एवं गंगेरम इन सभी जड़ी-बूटियों को आधा-आधा पाव लेकर कूट-पीस और छान लें। छः माशे से एक तोले तक यह चूर्ण प्रतिदिन फांककर दूध पीने से बेइन्तहा शक्ति बढ़ती है।

सफेद प्याज का रस आठ माशे, अदरक का रस छः माशे, शुद्ध शहद चार माशे और घी तीन माशे इन चारों को मिलाकर दो महीने तक सेवन करने से, नामर्द भगई हो जाता है।

चनिया पीसकर उसमें बराबर की खांड और घी मिलाएं। रोज छ पैसे भर खाने से बत बीर्य बढ़ता है।

नामर्दी का इलाज में सतावर, गोखरू, कौंच के बीजों की गिरी, तालमखाने के बीज, सेमर की मूसली, बरियारा के बीज और गुलसकरी- सभी को सात-सात तोले लेकर कूट-पीसकर छान लें। इसमें पूरे चूर्ण के बराबर मिश्री मिला दें और चौड़े मुंह की शीशी में भरकर रख दें। इस चूर्ण का सेवन कम-से-कम दो तीन माह तक करें। यह आजमाया हुआ नुस्खा है, जो बल-वीर्य बढ़ाता है।

नामर्दी की आयुर्वेदिक दवा:-

पीपल और मिश्री का समभाग पीसकर रख लें। छः माझे चूर्ण रोज फांकने पर दूध के साथबल-वीर्य बढ़ता है।

जमीकंद और तुलसी की जड़ दोनों को पान में रखकर खाने से, स्त्री प्रसंग के समय वीर्य स्खलित नहीं होता।

जरा-सी कौंच की जड़ मुंह में रखकर चूसते रहने और सम्भोग करने से, तब तक वीर्य स्खलित नहीं होगा, जब तक जड़ मुंह में रहेगी।

कमर में फिटकिरी बांधकर संभोग करने से वीर्य जल्दी स्खलित नहीं होता।

सूखी शकरकंदी कूट-छानकर घी और चीनी के साथ हलवा बनाकर खाने से वीर्य जल्दी ही पुष्ट होता है।

दूध या जायफल के साथ एक दो रत्ती बंग भस्म खाने से खूब ताकत आती है। इसे तुलसी के रस के साथ भी ले सकते हैं।

छोटी हरड़ और मिश्री के साथ लौह भस्म खाने से शरीर फौलाद जैसा हो जाता है।

नामर्दी का इलाज में काँच के बीजों की गिरी और तालमखाने के बीज- दोनों को बराबर बराबर लेकर पीस-छान लें। फिर उस चूर्ण में बराबर की मिश्री मिला दें। दो तोला चूर्ण रोज दूध के साथ लेने से खूब बल-वीर्य बढ़ता है। यह बहुत खास नुस्खा है।

पान के साथ दो-चार चावल भर चांदी या स्वर्ण भस्म खाने से शरीर में कामवेग प्रबल हो जाता है।

नामर्दी का इलाज – लौंग और शहद के साथ अभ्रक भस्म खाने से धातु बढ़ती है।

नामर्दी का इलाज – तरबूज के बीजों की गिरी और मिश्री छः छः माझे मिलाकर खाने से दो-तीन महीने में ही शरीर पुष्ट हो जाता है।

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FAQ:-

नपुसंकता का क्या कारण है?

बहुत अधिक मैथुन करने, असमय मैथुन करने, खट्टे, कड़वे, रूखे, कसैले, खारी एवं चटपटे पदार्थ खाने, चिंता और तनाव रखने तथा अप्राकृतिक साधनों से वीर्य त्यागने पर ही व्यक्ति नपुंसकता का शिकार होता है।
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स्तंभन दोष को दूर करने के लिए कैसे?

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